इज़राइल रक्षा बलों ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक शहर टायर में नए हमले किए और एक ईसाई बस्ती के लिए दुर्लभ निकासी आदेश जारी किया। यह आदेश सेना के प्रवक्ता अविचाय अदराई द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में दिया गया, जिसमें हेज़बुल्लाह द्वारा युद्धविराम के कथित उल्लंघनों का हवाला दिया गया। पहली बार किसी ईसाई इलाके की आबादी को सीधे तौर पर अपने घर खाली करने की चेतावनी दी गई है, जो संकेत देता है कि इस क्षेत्र में इज़राइली अभियान और तेज हो सकते हैं।
ईसाई बस्ती में निकासी का मतलब
अविचाय अदराई ने टायर और आसपास के क्षेत्रों, जिसमें ईसाई बस्ती भी शामिल है, के निवासियों को तत्काल चेतावनी भेजी। उन्होंने कहा कि इज़राइल रक्षा बलों को हेज़बुल्लाह द्वारा युद्धविराम समझौते के उल्लंघन और इज़राइली नागरिकों पर हमलों के कारण बलपूर्वक कार्रवाई करनी पड़ रही है। यह पहली बार नहीं है जब इज़राइली सेना ने इस क्षेत्र में हेज़बुल्लाह की मौजूदगी का आरोप लगाया है, लेकिन यह दूसरा मौका है जब उन्होंने इस इलाके पर हमला करने की आवश्यकता बताई है। इसी दिन लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) ने शहर के एक सामाजिक आवासीय क्षेत्र पर नए बमबारी की सूचना दी, जबकि बचाव दल मलबे से एक और शव निकाल रहे थे और अभी भी कई लोग लापता हैं।
मानवीय क्षति और बचाव अभियान
सोमवार को लेबनानी अधिकारियों ने बताया कि टायर पर हमले में पाँच लोग मारे गए और आठ अन्य घायल हो गए। ये आंकड़े उस हमले की मानवीय कीमत को दर्शाते हैं जो अमेरिका द्वारा मध्यस्थता वाले युद्धविराम के बावजूद जारी है। हेज़बुल्लाह ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया है और जब तक इज़राइली सेना लेबनानी धरती पर मौजूद है, तब तक वह इसे अस्वीकार करता है। इज़राइल का कहना है कि टायर से वापसी, जो उसके कब्जे वाले क्षेत्र के उत्तर में एक तटीय शहर है, हेज़बुल्लाह के उल्लंघनों के कारण आवश्यक है।
इज़राइल-ईरान तनाव का लेबनान पर प्रभाव
लेबनान के दक्षिण में ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब इज़राइल और ईरान ने रविवार और सोमवार के बीच सीधे टकराव के बाद युद्धविराम की घोषणा की थी। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों पक्षों से तत्काल गोलीबारी बंद करने के आग्रह के बाद हुआ। हालांकि, तेहरान ने कहा कि यदि इज़राइल लेबनान में हेज़बुल्लाह पर हमले जारी रखता है तो वह फिर से हमला करेगा। रविवार को शुरू हुए हमलों की लहर अप्रैल के युद्धविराम के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे सीधा टकराव थी और इसने वाशिंगटन के ईरान के साथ बातचीत और तीन महीने से अधिक चल रहे युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों को खतरे में डाल दिया है।
ईरानी जवाबी कार्रवाई और रणनीतिक लक्ष्य
इज़राइल ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया जब तेहरान ने रविवार के अंत में अपने क्षेत्र पर मिसाइलें दागीं। ईरानियों ने कहा कि उनके हमले बेरूत के आसपास हेज़बुल्लाह के गढ़ों पर इज़राइली बमबारी के जवाब में थे। एक इज़राइली हमले ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक पेट्रोकेमिकल कारखाने को निशाना बनाया, जो देश के अनुसार बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए इस्तेमाल होता था। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा कि उसने हाइफ़ा में एक समान इज़राइली कारखाने पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की।
ट्रम्प का संदेश और वाशिंगटन का दबाव
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि इज़राइल और ईरान "तत्काल युद्धविराम" चाहते हैं और शांति के लिए अंतिम बातचीत चल रही है, "बशर्ते कि अज्ञानता या मूर्खता उनमें बाधा न डाले।" राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी तब तक प्रभावी रहेगी जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता। एक इज़राइली अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। इससे पहले, एक इज़राइली सैन्य सूत्र ने कहा था कि देश "जब तक जरूरत हो" तब तक अभियान जारी रखने के लिए तैयार है और उसने हाल ही में पुनर्निर्मित ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों और पेट्रोकेमिकल लक्ष्य पर हमलों की पुष्टि की।
ईरानी अधिकारियों ने भी उतना ही चुनौतीपूर्ण रुख अपनाया। अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी तस्नीम द्वारा उद्धृत एक सैन्य सूत्र ने कहा कि तेहरान लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए तैयार है और वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों के खिलाफ फिर से हमले शुरू कर सकता है। इस बीच, टायर में बचाव दल मलबे के नीचे लापता लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं, जबकि हर नए बमबारी के साथ मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
टायर में मानवीय स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, जैसा कि स्रोत में उल्लेख है। स्थानीय निवासी अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं, जबकि बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने में जुटे हैं। हर नए हमले के साथ, मलबे के नीचे दबे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। बचाव दल सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं और हर नए बमबारी के साथ संकट और गहराता जा रहा है।
