अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि ईरान के साथ युद्धविराम के लिए एक समझौता ज्ञापन पर इस सप्ताहांत उपराष्ट्रपति जेडी वेंस यूरोप में हस्ताक्षर करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि यह दस्तावेज शनिवार (13 जून) से हस्ताक्षरित हो जाएगा, लेकिन उन्होंने सटीक स्थान या ईरानी प्रतिनिधि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। उनके इस बयान के बावजूद, तेहरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस घोषणा की वैधता पर संदेह पैदा हो गया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरानी शासन पर पिछले कई दिनों से भारी सैन्य दबाव बनाया हुआ था। हालांकि, राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि समझौता 'बहुत अच्छा' है और इसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की सहमति शामिल है।
ईरान पर सैन्य दबाव और बमबारी रद्द
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके बताया कि अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर नियोजित बमबारी रद्द कर दी है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में ईरान पर बहुत जोरदार हमले किए जा रहे थे, और आज रात और हमले करने की योजना थी। राष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 'बारीकियों से' बता दिया था कि वह क्या कर सकता है, क्योंकि तेहरान के पास जवाबी कार्रवाई के लिए कोई नौसेना या वायु सेना नहीं है। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि बातचीत भारी सैन्य दबाव के तहत हो रही थी, और बमबारी रद्द करना एक शर्त के रूप में देखा जा सकता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मौजूदा ईरानी सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने वाशिंगटन द्वारा लगाई गई शर्तों को स्वीकार कर लिया है।
नेगोशिएशन में 11 देशों की मध्यस्थता का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वार्ता सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता के साथ हुई और अंतिम शर्तों को मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल सभी 11 देशों की मंजूरी मिल गई है। ट्रंप के अनुसार, समझौते का मुख्य बिंदु यह है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या प्राप्त नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना 'हस्ताक्षर करते ही आधिकारिक रूप से' हो जाएगा, जो तेल टैंकरों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हालांकि, इस पूरे दावे में ईरानी पक्ष से कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में संशय बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: दोनों पक्षों के बयानों में टकराव
ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही अमेरिकी जहाजों के लिए खुला है, लेकिन ईरान ने तुरंत इसका खंडन किया। बुधवार को ट्रंप ने दावा किया था कि एक गुप्त सैन्य अभियान के बाद 200 अमेरिकी तेल टैंकर जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल परिवहन के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, और इसका नियंत्रण दोनों देशों के बीच एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा रहा है। वाशिंगटन के इस बयान का तेहरान ने कड़ा विरोध किया, और स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का एकतरफा यातायात खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। इस टकराव से यह साफ है कि समझौते की घोषणा के बावजूद वास्तविक स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
ईरान का पुख्ता इनकार और मध्यस्थता में अड़चनें
ईरानी क्रांतिकारी गार्ड से जुड़ी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बताया कि अब तक किसी भी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। एजेंसी ने ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा, 'कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और इस संबंध में कोई भी दावा तब तक अमान्य है जब तक ईरान में इसकी पुष्टि न हो।' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने बताया कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन बाधाएं अमेरिका की ओर से आ रही हैं। उन्होंने कहा, 'बातचीत की प्रगति शुरू से ही हमारे लिए स्पष्ट थी और अधिकांश पाठ अंतिम रूप दे दिया गया था, लेकिन अमेरिकी बार-बार अपनी स्थिति बदलते रहे। ईरान ने अपनी लाल रेखाओं पर कोई समझौता नहीं किया है।'
समझौते की अनिश्चितता और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
ट्रंप के दावे और ईरान के इनकार के बीच यह स्पष्ट है कि किसी भी ठोस समझौते पर अभी मुहर नहीं लगी है। बाघई के बयान से पता चलता है कि मध्यस्थता के प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी बनी हुई है। जहां ट्रंप राजनीतिक लाभ के लिए इस घोषणा को भुनाना चाहते हैं, वहीं ईरानी नेतृत्व सतर्क रुख अपनाए हुए है, ताकि किसी भी ऐसी प्रतिबद्धता से बचा जा सके जो सैन्य दबाव के सामने झुकने जैसी दिखे। इस अनिश्चितता से मध्य पूर्व में संकट लंबा खिंच सकता है, और नए सैन्य टकराव का खतरा बना रहेगा। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा अगर अनसुलझा रहता है, तो वैश्विक तेल बाजारों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इन दावों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं या खारिज करते हैं।
